जिसके पास कुछ भी नहीं है, अगर वह कहे, कि ‘मैंने सब कुछ त्याग कर दिया’,
तो वह सही नहीं है| सब कुछ होते हुए, सारी जिम्मेदारी निभाते हुए, जिसके मन
में त्याग की बुद्धि रखे, वह सबसे श्रेष्ठ है| एक फ़कीर कह सकता है, कि
‘मेरे पास कुछ भी नहीं है, झोपड़ी भी नहीं है, मैं तो बड़ा त्यागी हूँ’| तो
उनके त्याग को मैं त्याग नहीं मानता हूँ| सब काम करिये, सब जिम्मेदारी
उठाईये, और त्यागी बनिए|
~ श्री श्री
~ श्री श्री

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