Friday, 16 August 2013

प्र: गुरूजी, यदि कोई मेरी आलोचना करे और वो सही हो तो ठीक है| पर अगर वो सच नहीं है, तो मैं वो आलोचना ले नहीं पाता और अपना संतुलन खो बैठता हूँ| कृपया मार्ग दिखायें|
श्री श्री: जिस आलोचना को तुम स्वीकार नहीं कर पाते, उसे आरोप कहते हैं| आरोप से कैसे निपटें? धैर्य से| ये जानने के लिए अत्यंत धैर्य और श्रद्धा की आवश्यकता है कि सत्य की सदा विजय होगी|

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